
मध्य प्रदेश में एक ओर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश की लाड़ली बेटियों के लिए तरह-तरह की योजनाएँ लेकर आते हैं, वहीं उस प्रदेश में पिछले 20 महीने से एक लाड़ली की मौत की वजह अब तक न पुलिस को पता है और न ही उस लड़की के पिता को। क्यूंकि उस लाड़ली की फोरेंसिक रिपोर्ट 20 माह बाद भी नहीं आ पायी है।
मार्टिन लूथर किंग ने कहा था, कहीं भी अन्याय हर जगह न्याय के लिए खतरा है। मूल रूप से व्यक्ति न्याय पाने के लिए न्यायालय जाता है लेकिन जब न्याय में देरी होती है तो व्यक्ति अपनी उम्मीद खो देता है और इसलिए न्याय से वंचित रह जाता है। पर इस मामले में तो बात पिछले 20 महीने से एक काग़ज़ की वजह से थाना में ही अटकी हुई है।
मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित मझोली का है, जहाँ 24 जुलाई 2021 को 2 वर्षीय इनायत और उसके भाई साढ़े 3 वर्षीय भाई फ़ैज़ान की तबीयत खराब होने की वजह से उनके पिता जावेद उन्हें सीनियर फ़िज़ीशियन डॉ. सी. पी. तिवारी के क्लिनिक लेकर जाते हैं। जावेद के मुताबिक उनके दोनों बच्चों को उस क्लिनिक में डॉ. सी. पी. तिवारी की अनुपस्थिति में कम्पाउन्डर सूरज पटेल और विमल झारिया द्वारा एक-एक इन्जेक्शन लगाया जाता है। उनको घर लाने के बाद फैज़ान बेहोशी की हालत में पहुँच जाता है और इनायत को उल्टियाँ होने लगती हैं। बेटी की तबीयत बिगड़ते देख जावेद के मुताबिक वो उसे पहले वापिस तिवारी क्लिनिक लेकर जाता है जहाँ सूरज द्वारा कहा जाता है कि उसकी बेटी को ऑक्सीजन की जरूरत है। उनके पास क्लिनिक में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है इसलिए वो उसे शासकीय अस्पताल लेकर जाए। जावेद अपनी बेटी को मझोली के शासकीय अस्पताल लेकर जाता हैं। जहाँ डॉक्टर 2 वर्षीय इनायत को मृत घोषित कर देते हैं। हालांकि फैज़ान को घर पर ही साढ़े चार घंटे बाद होश आ जाता है। चिकित्सक की सूचना के आधार पर मझोली पुलिस द्वारा सीआरपीसी 174 के तहत अप्राकृतिक मृत्यु का मामला कायम करके शव का पोस्टमॉर्टम कर विसरा सुरक्षित कर लिया जाता है। अपनी बेटी की असमायिक मौत के दुख से पीड़ित पिता जावेद द्वारा डॉ. सी.पी. तिवारी के कम्पाउन्डर्स के खिलाफ़ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश बेकार जाती है। मामले की विवेचना कर रहे मझोली थाना उप निरीक्षक जी.पी.तिवारी ने बताया कि दोनों बच्चों एक जैसा इलाज दिया गया था। लेकिन मृतिका इनायत की स्थिति पहले से ही गंभीर थी। इसलिए इलाज के बाद उसकी मृत्यु हो गई। उनक कहना है कि एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में आगे कुछ किया जा सकता है। पुलिस के मुताबिक फोरेसिंक विभाग को विसरा की जांच रिपोर्ट भेजने के लिए पत्र लिख कर निवेदन किया जा चुका है लेकिन अब तक जांच न होने से रिपोर्ट नहीं आ पायी है।

वहीं पीड़ित जावेद पेशे से ऑटो चालक हैं, उनका कहना है कि चिकित्सक की अनुपस्थिति में दोनों कम्पाउन्डर्स ने बच्चों को किस चीज़ का इन्जेक्शन दिया इसकी खोजबीन तो होना चाहिए थी। इसके लिए एफएसएल रिपोर्ट का बहाना क्यूँ बनाया गया? उनका आरोप है कि मामले से संबंधित लोगों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है। इसलिए मामला दबाने का प्रयास किया जा रहा है।