
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपनी लाड़ली बहिनों के जीवन को सरल बनाने के लिए लगभग एक दर्जन योजनाएँ चला रहे हैं। जिसमें हाल ही में लाड़ली बहना योजना में उन्होंने 1000 रुपये प्रतिमाह राशि को सिलसिलेवार ढंग से 3000 रुपये प्रतिमाह करने की बात भी कही है। लेकिन उनकी हाल ही की जनआशीर्वाद यात्रा में उनके स्वागत के लिए जिन लाड़ली बहिनों को ले जाया गया उन्हें दस दिन बीत जाने के बाद भी कोई भुगतान नहीं किया।

क्या है पूरा मामला – 22 सितंबर को सीएम की जनआशीर्वाद यात्रा में जबलपुर नगर निगम के पूर्व कमिश्नर और आईएएस वेदप्रकाश के साथ सीएम का स्वागत करने के लिए उनके कार्यकर्ता ब्रह्मा वैष्णव ने कुछ महिलाओं को बुलाया। जहाँ उन महिलाओं को मुख्यमंत्री के स्वागत के दौरान मौजूद रहना था। उन महिलाओं के मुताबिक वैष्णव ने उन्हें इस कार्य के बदले 500 रुपये प्रति महिला के हिसाब से भुगतान देने का वादा किया था लेकिन उसने दस दिन बाद भी अपना वादा नहीं निभाया। भुगतान नहीं मिलने की सूचना वेदप्रकाश को भी दी गई लेकिन उन्होंने महिलाओं को उसी व्यक्ति से संपर्क करने के लिए कहा जो उन्हें कार्यक्रम में लेकर आए थे। इसके बाद इन महिलाओं ने जब ब्रह्मा वैष्णव और उनके साथी से भुगतान की मांग की लेकिन भुगतान न मिलने से वे निराश हो गईं। जिन महिलाओं ने अन्य महिलाओं को इस काम के लिए जोड़ा था अब वे ही अपनी साथी महिलाओं के द्वारा पैसे के लिये बार-बार उनके घर का चक्कर लगाने से परेशान हो रही हैं। महिलाओं ने 102 महिलाओं की सूची दिखाते हुए बताया कि इनका भुगतान अभी तक बाकी है।

क्यूँ बनना पड़ता है भीड़ का हिस्सा – रोजमर्रा की आवश्यकता को पूरा करने के लिए इन महिलाओं को अपना परिवार चलाने के लिए अतिरिक्त आमदानी की आवश्यकता भी होती है। जिसके लिए ये सिलाई का काम या दूसरों के घरों में खाना बनाने का काम भी करती हैं। घर का खर्च आसानी से चल पाये इसके लिए ये महिलायें राजनीतिक आयोजनों में श्रोताओं की भूमिका निभाती हैं। नारे भी लगाती हैं और हाथों में तख्तियाँ भी पकड़ती हैं। जिसके लिए इन्हें 500 रुपये का भुगतान मिलता है। लेकिन कई बार इन आयोजनों में इन्हें भारी अव्यवस्था का भी सामना करना पड़ता है और कभी-कभी तो बैठने के लिए कुर्सियों से लेकर पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं मिल पाती।
इस मामले में जब ब्रह्मा वैष्णव से प्राथमिक मीडिया ने फोन करके संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि “स्वागत के लिए 500 महिलाओं को बुलाया था, कहीं से महिलायें आ पाती हैं कहीं से नहीं आ पाती हैं। जो जो महिलायें आयीं उन्हें खर्चापानी दिया गया, जो नहीं आयीं उन्हें कैसे दे सकते हैं?” शिकायतकर्ता कह रहीं है कि उनकी अधिक से अधिक महिलायें आईं थी लेकिन हमारे मुताबिक उतनी महिलायें स्टेज पर नहीं थीं।